Diet and daily routine in Winter season : Hindi

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शरद ऋतु और आपका आहार

drmonicaAuthor: डॉ० मोनिका श्रेष्ठा

MS (Ayurveda)

कंसलटेंट सर्जन व आयुर्वेद विशेषग्य 

 

 

Diet and daily regimen in winters

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(1)——-शरद ऋतु में सूर्य की गरम किरणों के प्रभाव से शरीर में संचित पित्त प्रकुपित हो जाता है तथा रक्त भी पित्त के प्रकुपित होने से दूषित हो जाता है। ऐसी स्थिति में आहार-विहार संबंधी नियमों का पालन आरोग्य लाभ के लिए अति आवश्यक है। शरद-ऋतु में खुलकर भूख लगने पर ही भोजन करना चाहिए तथा ग्रहण किया जाने वाला भोजन स्वाद में मधुर, हल्का तथा तिक्त रस युक्त होना चाहिए…

(2)—–वर्ष में कुल 6 ऋतुएं होती हैं और इन ऋतुओं के अनुसार निर्देशित आहार-विहार को अपनाने वाला ही सदा स्वस्थ रहता है।

(3)—– आयुर्वेद में इन ऋतुओं के लिए अलग-अलग आहार-विहार का वर्णन मिलता है। जिसे अपनाकर आरोग्य और आनंद की प्राप्ति संभव है।

(4)—– शरद ऋतु में सूर्य की गरम किरणों के प्रभाव से शरीर में संचित पित्त प्रकुपित हो जाता है तथा रक्त भी पित्त के प्रकुपित होने से दूषित हो जाता है। ऐसी स्थिति में आहार-विहार संबंधी नियमों का पालन आरोग्य लाभ के लिए अति आवश्यक है।

(5)—–शरद-ऋतु में खुलकर भूख लगने पर ही भोजन करना चाहिए तथा ग्रहण किया जाने वाला भोजन स्वाद में मधुर, हल्का तथा तिक्त रस युक्त होना चाहिए। इस ऋतु में प्रायः ऐसा भोजन चाहिए जो पित्त नाशन का कार्य करता हो।

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(6)—–इस ऋतु में हरड़ का प्रयोग विशेष रूप से लाभप्रद है, अतः मिश्री अथवा गुड़ व धनिए के साथ हरड़ का सेवन करना चाहिए। इसके साथ ही शक्कर के साथ आंवले का सेवन करने से लाभ मिलता है।

butter(7)——इस ऋतु में गेहूं, ज्वार, बाजरे की गरम रोटी, गाय का दूध, मक्खन, घी, मलाई, श्रीखंड आदि आहार द्रव्यों का सेवन हितकर है। सब्ज्यों में चौलाई, बथुआ, लौकी, तोरई, फूलगोभी, मूली, पालक, मेथी आदि का सेवन करना चाहिए। मूंग की दाल और सेम का सेवन भी लाभप्रद है।

singraha(8)—— फलों में अनार, केला, सिंघाड़ा आदि का सेवन शरद ऋतु में लाभप्रद माना गया है। मुनक्का और कमलगट्टा जैसे शीतल द्रव्य, जो पित्त का शमन करते हैं, इस ऋतु में विशेष रूप से सेवनीय हैं। शरद ऋतु में मुख्य रूप से कषाय, मधुर नमकीन तथा ठंडी तासीर वाले द्रव्यों का सेवन लाभप्रद होता है।

(9)—–शरद ऋतु में सुबह हल्का, मधुर रस प्रधान और शीघ्र पचने वाला नाश्ता लेना चाहिए। एक गिलास दूध अथवा दूध से बनी खीर या फिर दलिया का सेवन किया जा सकता है।

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(10)—-गुड़- घी के साथ गरम रोटी अथवा चना के सत्तू में घी और चीनी मिलाकर नाश्ते में लेना लाभप्रद है। इस ऋतु में सुबह की धूप में बैठकर तेल मालिश करनी चाहिए। तेल मालिश से हड्डियों को विशेष शक्ति मिलती है। मालिश के बाद स्नान करके गीले शरीर को पोंछकर सूखे मौसम के अनुसार गरम व मोटे वस्त्र धारण करने से तरोताजा की अनुभूति होती है।

(11)—– इस ऋतु में मट्ठे का प्रयोग हानिकारक माना गया है तथा लहसुन, बैंगन, करेला, सौंफ, हींग, काली मिर्च, पीपल, सरसों का तेल आदि द्रव्यों का प्रयोग अधिक नहीं करना चाहिए।

(12)—- इस ऋतु में खट्टे व चरपरे पदार्थों जैसे कढ़ी आदि का सेवन कम करना चाहिए।

(13)—–लोग इस ऋतु में सर्दी का मौसम समझकर पानी कम पीते हैं जो कि गलत है, अतः पानी का प्रयोग प्रचुर मात्रा में करें।

(14)—– आयुर्वेद के अनुसार शरद ऋतु में पौष्टिक तत्व वाले पदार्थों तथा मौसमी फलों का सेवन करना चाहिए।⁠⁠

 

 

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