शहद: ऋषियों की आधुनिक युग को भेंट

डायबिटीज- इससे बचाव है आपकी अपनी ज़िम्मेदारी

शहद: ऋषियों की आधुनिक युग को भेंट

honeyआज का युग दौड़ का युग है। आधुनिकता की अन्धी दौड़ जिसमें हर कोई जल्दी में है, लेकिन क्यों है यह शायद वह खुद भी नहीं जानता। ऐसे में चिंताएं और नित नयी बीमारियाँ होना स्वाभाविक है। आजकल लोग भी भोजन से अधिक दवाइयां खा रहे हैं। विडंबना यह है कि पहले तो मनुष्य सुखी और स्वस्थ रहने के लिए धन कमाता है और फिर उसी सुख और स्वास्थ्य को पाने के लिए उस धन को दवाइयों पर खर्च कर देता है। ऐसे में आवश्यकता इस बात की है कि सभी लोग कुछ देर उन वस्तुओं पर विचार करें जिनका उपयोग प्राचीन काल में हमारे ऋषि मुनि करते थे और जिनके बारे में वे हमारे लिए प्राचीन ग्रंथों में आवश्यक जानकारी दे गये हैं।

इनमें मेरे विचार से सबसे पहले आता है शहद। यह साधारण होकर भी कई रोगों को सफलतापूर्वक दूर करने में समर्थ है। धार्मिक कार्यों में तो इसका उपयोग होता ही है। पंचामृत का यह प्रमुख तत्व है। मनुष्य को आरोग्यता प्रदान करने वाले सभी तत्व इसमें विद्यमान हैं इसलिए इसका उपयोग करने में किसी भी आयु वर्ग के लोग थोड़ा भी संकोच न करें।

Raw-Honeyशहद Apies mellifera नामक मधुमक्खियों द्वारा बनाया जाता है। ये मधुमक्खियां अलग-अलग फूलों से रस इकट्ठा करके उनसे शहद बनाती हैं। इसमें ख़ास बात यह है कि रस जिस फूल का होगा, बनाए गए शहद के स्वरूप और गुण भी उसी फूल के अनुरूप होंगे। सरसों और सेब के फूलों के रस से जो शहद मधुमक्खियां बनाती हैं वह गाढ़ा होता है। इसी प्रकार नीम के फूलों से बनाया गया शहद पतला होता है। इसी तरह सफ़ेद रंग के फूलों से बना शहद हलके रंग का होगा और गहरे रंग के फूलों से बना शहद गाढ़ा व बादामी रंग का होगा। इनमें सफ़ेद और हलके पीले रंग का शहद ज्यादा बढ़िया माना जाता है। गुलाब के फूलों से बना शहद ठंडा होगा व नेत्र रोग में और जलन शांत करने के लिए अच्छा होगा। नीम के फूलों से बने शहद में विष नाशक व त्वचाविकार नाशक गुण होते हैं।

शहद को आमतौर पर लोग आहार के रूप में लेते हैं। इसके साथ ही किसी बीमारी में औषधि के साथ शहद लेना लाभकारी होता है। बच्चों को एक बार में 4 ग्राम, युवक को 8 ग्राम और वृद्धों को लगभग 12 ग्राम शहद पानी में डालकर पीने के लिए देना चाहिए। याद रखिये शहद को कभी गर्म नहीं करना चाहिए और न ही गर्म वस्तुओं के साथ लें वरना आयुर्वेद मतानुसार यह हानिकारक हो जाता है।

असली शहद की पहचान 

Ayurveda-and-Honeyजैसे-जैसे किसी भी वस्तु का प्रयोग हमारे समाज में बढ़ता है वैसे-वैसे ही उसमें मिलावट का सिलसिला भी बढ़ता है। शहद में भी आजकल खूब मिलावट की जाती है जिससे यह फायदे की जगह नुकसान करता है। ऐसे में आवश्यक है कि सभी लोग असली शहद को कुछ प्रयोग करके पहचानना सीख लें जैसे –

1- शहद की 4-5 बूँद पानी में डालें। वे अगर बूँद के रूप में ही पानी के तल तक पहुँच जाएँ तो शहद असली है, किन्तु अगर शहद फ़ैल जाये तो नकली है।

2- शहद को कांच की परखनली में डालें। उतने ही भाग में ऐल्कोहोल डालकर अच्छी तरह हिलाएं। अगर शहद में गुड या चीनी मिलाई गयी है तो घोल का रंग मैला हो जायेगा वरना घोल साफ़ रहेगा।

3- शहद में माचिस दिखाएं अगर वह तुरंत जले तो शुद्ध वरना शुद्ध नहीं है।

4- कभी-कभी लोग शहद में गेहूं का सत मिलाते हैं। ऐसे में शहद में आयोडीन का घोल मिलाकर देखें, अगर शहद का रंग नीला हो जाये तो समझें कि शहद में मिलावट है।

5- शहद को परखनली में डालकर मिथाईलेटेड स्पिरिट डालकर हिलाएं। अगर शहद नीचे बैठ जाए तो शुद्ध वरना मिलावटी है।

औषधि के रूप में शहद प्रयोग के हमारे अनुभव 

honey healthyमेरे पास ऐसे अनेक रोगी आते हैं जिन्हें वर्षों से कोई न कोई बीमारी लगी रहती है ; और इलाज में बहुत पैसा खर्च होता रहता है। मैं अपने बहुत से रोगियों को शहद सेवन की सलाह देता हूँ। इस प्रकार की पुरानी बीमारियों वाले मरीजों को और जनसामान्य के हित के लिए शहद द्वारा प्रारंभिक चिकित्सा बतायी जा रही है। आपको सलाह दी जाती है कि यदि आपको शुद्ध शहद मिल जाए तो यह प्रयोग करें। परन्तु इनसे भी आराम न मिले तो आयुष चिकित्सक से मिलकर परामर्श द्वारा इसकी पूर्ण चिकित्सा करें। किसी भी रोग की स्वयं चिकित्सा नहीं करें और न ही बिना डिग्री वाले डॉक्टर से करवाएं।

1. हृदय रोग में –

शहद 3 चम्मच एक दिन में 3 बार नियमित रूप में लेने से व्यक्ति को हृदय रोग व हार्ट फेल जैसे रोगों की सम्भावना कम होती है।

2. बच्चों की कमजोरी में –

प्रतिदिन बच्चों को शहद का सेवन करायें। इससे उनका शारीरिक व मानसिक विकास शीघ्रता से होगा।

3. कब्ज़ हो जाने पर –

हर दिन शाम को आंवले के चूर्ण के साथ शहद लेने से कब्ज़ की शिकायत नहीं होती।

4. माइग्रेन में –

सामान्य भाषा में इसे आधा सीसी का दर्द या माइग्रेन कहते हैं जिसमें मनुष्य को सूर्योदय से सूर्यास्त तक सर के आधे भाग में दर्द होता है। ऐसे में सुबह शाम 3 से 4 चम्मच शहद लेने से फायदा होता है।

5. अनिद्रा में –

रात में सोते समय शहद को पानी या दूध में मिलाकर पीने से व्यक्ति को नींद अच्छी आती है।

6. घाव में –

घाव हो जाने पर अगर कोई औषधि न मिले तो शहद लगाना फायदा करता है। इससे घाव जल्दी भरता है।

7. शैय्या मूत्र में –

अपने आप बिस्तर पर मूत्र निकल जाना बच्चों में एक आम समस्या है। ऐसे में 2 चम्मच शहद बच्चे को दिन में 3-4 बार पिलाएं।

8. जलने पर-

काम करते समय अक्सर लोग ध्यान न देने से जल जाते हैं। ऐसे में शहद लगाने से अंगों में जलन नहीं होती और घाव भी जल्दी भर जाते हैं।

9. गले की सूजन में –

इस अवस्था में गरम पानी में थोड़ा शहद डालकर पीने से लाभ होता है।

10. यकृत और प्लीहा रोग में –

इन अंगों से संबंधित रोगों में पुनर्नवा नाम के पौधे के मूल का रस और शहद मिलाकर लेना श्रेष्ठ होता है।

11. दमे में –

अडूसे का काढ़ा बनाकर उसमें 1 चम्मच शहद मिलाकर पीने से दमे में लाभ होता है।

12. अम्लपित्त में –

ऐसे में भोजन से आधा घंटा पूर्व पानी में शहद मिलाकर पीने से लाभ होता है।

13. जीवाणु प्रतिरोधी –

शहद में जीवाणु प्रतिरोधात्मक क्षमता होती है। यह स्ट्रेप्टोकोकस, स्टेफाईलोकॉकस, साल्मोनेला और हेमोलिटिक जीवाणुओं को मारने की क्षमता रखता है।

14. निमोनिया –

निमोनिया, सर्दी, जुकाम में यह लाभकारी होता है।

15. तृष्णा –

बार-बार यदि किसी को प्यास लगती हो तो उसे पानी में शहद मिलाकर पिलाना चाहिए।

16. मलेरिया में –

250 ml पानी में 2 नींबू निचोडे़ं और उनके छिलके भी उस पानी में डालकर खौला लें। ठंडा करने के बाद उसमें 2 चम्मच शहद मिलाएं और रोगी को पिला दें। ऐसा 5 दिन करने से रोगी को मलेरिया जनित समस्याओं में फायदा होगा।

17. रक्तचाप में –

बढ़े हुए रक्तचाप में 5 लहसुन की कलियाँ लें और उन्हें एक चम्मच शहद के साथ चबाने को दें। इससे शीघ्र ही रोगी को लाभ होता हैं।

18. मोटापे में –

सुबह उठकर हर दिन एक ग्लास पानी में एक नींबू और 1 बड़ी चम्मच शहद मिलाकर पीने से मोटापा दूर होता है लेकिन यह प्रयोग कुछ महीनों तक करना पड़ेगा। इसके साथ ही व्यक्ति को प्रतिदिन 45 मिनट तक चलना होगा।

19. खांसी में –

अदरक के स्वरस में शहद मिलाकर पीने से खांसी दूर होती है।

20. मुख दौर्गंध्य में-

एक भाग गुलाब जल, एक भाग नींबू का रस और एक भाग शहद मिलाकर प्रतिदिन गरारे करने से मुख दौर्गंध्य का नाश होता है।

21. गर्भावस्था में –

गर्भवती महिलाओं में कमजोरी, चक्कर आना, नींद न आना, घबराहट जैसी परेशानियां होती हैं। इन सभी अवस्थाओं में शहद का प्रयोग करने से बहुत लाभ होता है और गर्भस्थ शिशु भी स्वस्थ जन्म लेता है।

तो मित्रों आज से ही अपने भोजन में शहद का प्रयोग करना प्रारम्भ करें। आजकल हो रही नित नयी शारीरिक व मानसिक परेशानियों से छुटकारा पाया जा सकता है। बस आवश्यकता है तो जीवनशैली व भोजन में कुछ बदलाव करने की। असली शहद की पहचान करें और इसे अपने जीवन में एक महत्वपूर्ण स्थान देकर देखिए। शीघ्र ही इससे आपको सुखायु प्राप्त होगी।

डॉ.स्वास्तिक

चिकित्सा अधिकारी

(आयुष विभाग, उत्तराखंड शासन)

(ये सूचना सिर्फ आपके ज्ञान वर्धन हेतु है। किसी भी गम्भीर रोग से पीड़ित होने पर चिकित्सक के परामर्श के बाद अथवा लेखक के परामर्श के बाद ही कोई दवा लें। पब्लिक हेल्थ के अन्य मुद्दों तथा जनहित के लिए सुझावों के लिए लेखक से drswastikjain@hotmail.com पर संपर्क किया जा सकता है )

 

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