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Mouth ulcers; Natural Ayurveda remedies


मुंह के छाले: अब बीते दिनों की बात !!!

हम सभी के जीवन में कभी न कभी मुह में छालों की समस्या आई होगी. यह एक ऐसी समस्या है जो किसी न किसी रूप में हमारे अनियमित खान पान और पेट की समस्याओं से जुडी हुई है. आयुर्वेद में इस प्रकार की समस्याओं का उद्गम पेट के रोगों से होना माना गया है जो कि पित्त प्रकोपक आहार विहार के पालन से उत्पन्न होता है. आम तौर पर जब कोई रोगी हमारे पास भूरे पीले अथवा लाल रंग के मुह में धब्बे, लालिमा होना, खाने में समस्या, जलन की शिकायत के साथ आता है तो उसकी डायग्नोसिस माउथ अल्सर बना दी जाती है. सामान्य उपचार में रोगी को घी अथवा नारियल तेल लगाने को कह दिया जाता है. परन्तु अगर इस सामान्य उपचार से भी कोई आराम न हो और कंडीशन बढ़ने लगे तो इसके समुचित निदान और उचित इलाज की आवश्यकता होती है. आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति में इस प्रकार के रोगों का विस्तार से वर्णन किया गया है और आसानी से इलाज भी किया जा सकता है.

 मुंह के छालों के सामान्य कारण -

  1. मानसिक तनाव
  2. मुंह में चोट लगना
  3. दंत शल्य क्रिया के बाद होने वाले इन्फेक्शन
  4. इम्युनिटी कम होना
  5. अत्यधिक खट्टे पदार्थ जैसे नींबू, संतरा, अंजीर, टमाटर, अन्नानास इत्यादि फलों का अत्यधिक और अनियमित सेवन.
  6. विटामिन b, आयरन और फोलिक एसिड की कमी होना.
  7. कुछ अन्य रोग जिसमे अमाशय शोथ, इरीटेबल बोवेल सिंड्रोम, क्रोहन्स डिजीज आदि.
  8. पित्त प्रकोपक आहार विहार करना जिसमे लाल मिर्च,काली मिर्च, अदरख, मसालेदार और बहुत गर्म खाना खाने कि आदत.

 आयुर्वेद मतानुसार मुंह के छाले-

आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति में इस रोग को मुखपाक नाम से जाना जाता है. सुश्रुत संहिता में इस रोग का विस्तारपूर्वक वर्णन और इसकी उचित चिकित्सा भी बताई गयी है. सुश्रुत संहिता में एक दो नहीं बल्कि 64 प्रकार के मुख रोगों के निदान और उनके प्रकार के वर्णन के साथ साथ इस सब रोगों कि विस्तार से चिकित्सा भी बताई गयी है जिसमे मुंह में प्रयोग किये जाने वाली औषधियां लेप सम्मिलित हैं.

 सामान्य लक्षण-

आम तौर पर हमारे पास रोगी कुछ सामान्य शिकायतें लेकर आते हैं जो निम्न हैं-

मुंह का स्वाद बिगड़ जाना, निगलने में परेशानी, मुह में जलन, लालिमा, धब्बे होना, लार का ज्यादा बनना, खाने पीने में तकलीफ, कभी कभी धब्बों से खून का आना, मुंह के किनारे फटना आदि.

 बचाव के उपाय-

1. पित्त प्रकृति वाले लोगों को यह समस्या होने कि सबसे अधिक सम्भावना होती है. इसलिए ऐसे लोग उष्ण, मसालेदार, तैलीय आहार विहार से बचें. भोजन को सही समय पर और कुछ ठंडा करके खाने की आदत डालें.

2. बीच बीच में खाने का त्याग या अनियमित खानपान से बचें. अगर आप पट प्रकृति के हैं तो उपवास की आदत से बचें.

3. गर्म और मसालेदार भोजन का ही त्याग कर दें और फ़ास्ट फ़ूड जैसे बर्गर, पिज़्ज़ा इत्यादि को न खाए.

4. सामान्य रूप से आप गरिष्ठ भोजन न करें और हल्का तथा सुपाच्य भोजन लें. यदि खाने में कुछ मीठा भी सम्मिलित करलेते हैं तो पित्त शमन हो जायेगा.

5. अगर आपको बार बार यह अवस्था हो जाती है तो भोजन में नियमित रूप से शुद्ध घी, खीर, ककड़ी, धनिया, लौकी, खजूर, सौंफ का सेवन करते रहें. इससे आपको आराम मिलेगा.

 सामान्य उपचार-

1. अमरुद की कुछ पत्त्तियाँ लेकर उसे धीमे धीमे चबाते रहें और उसका रस लार में मिल जाने दे. इससे आपके मुंह में दर्द और सूजन से आराम मिलेगा.

2. 250 mg सुहागा लें और उसमे आधा चम्मच शहद मिलाएं. इस मिश्रण को दिन में 3 बार छालों पर लगायें. यह छालों के घाव को भरने में मदद करता है.

3. बेर की पत्तियां लेकर उसकी लुगदी बनायें और फिर पानी में उबालें. इसमें 4 – 5 बूँद एरंड तेल डालें. इस मिश्रण को कुछ देर मुंह में रखकर मुंह बंद रखें और फिर गरारे करें. कुछ ही दिनों में आप मुंह के छालों की समस्या से आराम पाएंगे.

4. 1 चम्मच धनिया पाउडर लेकर इसे एक कप पानी में मिलाएं और रात भर ऐसे ही रहने दें. सुभ सुभ खाली पेट पी जाएँ. कुछ ही दिन में आप फर्क महसूस करेंगे.

5. 5 बादाम और 5 रेसिन के टुकड़े लेकर पानी में भिगोदें और रातभर ऐसे ही पड़े रहने दें. सुबह सुबह इसे चबा चबाकर खा लें.

6. हफ्ते में कम से कम दो से तीन बार नारियल पानी या गन्ने का रस पिया करें.

7. नारियल के टुकड़े को मुंह में रखकर धीरे धीरे चूसते रहें. यह घाव में दर्द और सूजन को कम करके घाव भरने में सहायता करता है.

8. मुंह के छालों में नारियल का तेल अथवा शुद्ध घी लगाया करें इससे इनमे जल्दी आराम होगा. इसके अलावा छालों में कुछ हल्दी भी बुरक दें जिससे घाव भरने में शीघ्रता होगी.

 विशिष्ट आयुर्वेदिक उपचार-

इसके अलावा रोग की बढ़ी हुई और पुरानी अवस्था में आयुर्वेदिक विशेषज्ञ विशिष्ट औषधियों के प्रयोग से मुंह के छालों का इला करते हैं. इन विशिष्ट औषधियों को लेप,गरारे, कुल्ला करना और खाने के लिए प्रयोग करवाया जाता है. आयुर्वेद में मुख् रोगों की चिकित्सा में कवल और गन्दुश नामक प्रक्रिया द्वारा उपचार किया जाता है. विशेषज्ञ रोगों की जटिलता के अनुसार इन प्रक्रियाओं को रोगी पर सफलतापूर्वक प्रयोग करते हैं. विभिन्न अवस्थाओं में रसायन औषधियां जैसे च्यवनप्राश रसायन, ब्रह्म रसायन, आमलकी रसायन, हरीतकी रसायन प्रयोग और पंचकर्म प्रक्रिया द्वारा उपचार किया जाता है.

 मुख रोगों में प्रयुक्त विशिष्ट आयुर्वेदिक जड़ी बूटियाँ-

1. रक्तशुद्धि और घाव भरने के लिए Acacia catechu (खदिर) का प्रयोग किया जाता है क्योंकि इसमें astringent गुण होते हैं.

2. मुंह के छालों के घाव के उतकों को भरने में सहायता के लिए बेर की पत्तियों का उपयोग किया जा सकता है.

3. यदि अवस्था बिगड़ी हुई है तो घावों को भरने, उसके पोषण और उनमे नयी जान लाने के लिए आंवला खाया करें.

4. शरीर में पित्त दोष की वृद्धि होने पर अंगूर या किशमिश का नियमित सेवन करे. इससे मुंह के छालों का पित्त शमन होने लगेगा.

5. हरीतकी एक ऐसी औषधि है जो पुनर्स्थापक, मलावरोधक और घाव को भरने के गुणों से युक्त होती है. इसका नियमित प्रयोग करें और मुंह के छालों में आराम पायें.

6. यदि छालों के कारण वहां के मसूड़ों में इन्फेक्शन के कारण जलन हो तो चन्दन पाउडर का हल्का लेप लगाया जा सकता है.

7. Vittivera zizinoides (उशीर) में ठंडक देने के गुण और छालों को समाप्त करने के गुण होते हैं.  

8. Pumaria parviflora (पर्पटक) में रक्तशुद्धि गुण होते हैं और यह विकृत पित्तदोष का शमन करता है.

10.Ixora grandiflora (रक्तिका) में भी शीतलता, सौम्यता और त्वचा के पुनर्जीवितीकरण के गुण होते

11.Cyperus rotundus (मुस्तक) एक पाचक गुण वाली औषधि है और इसमें शारीरिक उतकों में रोगनिवारक क्षमता बढ़ने के गुण होते हैं.

12. Psidium guava (अमरुद) एक उपयोगी वनस्पति है जिसकी पत्तियों में मुंह के छालों को भरने के गुण होते हैं.

 विशेष-

यह लेख मुंह के छालों के सामान्य आयुष उपचार की जन सामान्य को जानकारी और आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति को लोगों तक पंहुचाने के लिए लिखा गया है. यदि आप किसी विशेष और गम्भीर रोग से पीड़ित हैं तो अपने निकट के आयुष विशेषज्ञ से मिलकर ही अपना इलाज करवाएं.

 

सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः  

सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद्दुःखभाग्भवेत् 

 

  शेष अगली पोस्ट में.....

प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा में,  

 

आपका अपना,

Dr. Swastik Jainडॉ.स्वास्तिक 

चिकित्सा अधिकारी

आयुष विभाग , उत्तराखंड शासन )

(निःशुल्क चिकित्सा परामर्श, जन स्वास्थ्य के लिए सुझावों तथा अन्य मुद्दों के लिए लेखक से drswastikjain@hotmail.com पर संपर्क किया जा सकता है )

 

 

 


Dr. Naveen Chauhan

B.A.M.S, C.C.Y.P, P.G.C.R.A.V
(Kshara-sutra) Ayurveda Consultant& Kshara-sutra surgical specialist for proctological diseases