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Ayurveda remedies for alcoholism


शराब की लत छुडाने में आयुर्वेद सक्षम

शराब का सेवन सम्पूर्ण विश्व में अधिकांश देशों में किया जाता है. इसके नियमित उपयोग से इसके प्रति निर्भरता उत्पन्न हो जाती है जिसे अल्कोहोलिस्म या शराब की लत के नाम से सामान्यतः जाना जाता है. इस अवस्था में मानसिक, शारीरिक, सामाजिक और आर्थिक कठिनाइयाँ भी सामने आती हैं जिससे अल्कोहोलिस्म से प्रभावित व्यक्ति और उसके परिवार का ही नुक्सान होता है. मेडिकल भाषा में इसे Alcohol dependence syndrome कहते हैं. क्योंकि यह एक बीमारी ही नहीं है बल्कि अनेक लक्षणों का समूह है. विश्व भर में हर 18 मौतों में एक मौत शराब की वजह से ही होती है। सड़क दुर्घटनाओं में भी सबसे ज्यादा मौतें शराब के नशे में गाड़ी चलाने से ही होती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन डब्ल्यूएचओ के आंकड़ों के अनुसार शराब की वजह से हर 10 सेकेंड पर एक व्यक्ति की मौत होती है। विश्व भर में मरने वाले लोगों में से करीब 6 प्रतिशत आल्कोहल की वजह से मरते है । हमारे पास अनेक रोगियों के प्रश्न आते हैं जिनमे इसके आयुष चिकित्सा द्वारा उपचारों के बारे में पूछा जाता है.

इस लेख के माध्यम से हम आयुर्वेद में इसके उपचार और आसान उपायों की सम्भावनाओं पर चर्चा कर रहे हैं. आयुर्वेदिक ग्रंथों में इस अवस्था का अनेक जगह वर्णन आया है और उपचार भी वर्णित है. इस अवस्था को   मद्यपाश, मद्यासक्ति नाम से भी जान सकते हैं. चरक संहिता में मद्य से सम्बन्धित ‘मदात्यय चिकित्सा’ नाम का भी अध्याय है जिसमे मद्य से सम्बन्धित विकारों की अवस्थाएं और उनके आयुर्वेदिक उपचार के बारे में विस्तार से बताया गया है. अगर आप भी शराब करते हैं और आपको  निम्न लक्षण प्रतीत हों तो संभल जाइये क्योंकि अब आप भी इसके लती होते जा रहे हैं-

हाथ पैर कांपना, सिरदर्द, चक्कर आना, पसीना आना, अस्थायी मानसिक विक्षोभ, घबराहट, गुस्सा आना, चिडचिडापन आदि लक्षण.

आयुर्वेद के अनुसार मद्य के गुण-

लघु (light), विकासी (expanding),  उष्ण (hot), व्यवायी (prevador), आशुकारी (quick action), सूक्ष्म (subtle), अम्ल  (Acidic), विषद (drying), तीक्ष्ण (sharp), रुक्ष (rough),

 

सामान्य उपचार-

1. अधिक मात्रा में मद्य का सेवन विष माना गया है. जिसकी चिकित्सा आवश्यक है.
2. धनिया पाउडर, काली मिर्च पाउडर और मिश्री का सम भाग में मिश्रण लें और लगभग 1 चम्मच 1 कटोरी पानी में भिगो कर रात भर ऐसे ही रहने दे. अगली सुबह खाली पेट इसे छानकर पी जाए. इस मिश्रण में antioxidant गुण होते हैं. जो कि मद्य के विषाक्त असर को कम करने में मदद करता है.
3. 1 नीम्बू के रस में चीनी और अल्प मात्रा में नमक मिलाएं और इसे सुबह सुबह लिया करें यह भी शराब के विषाक्त असर को कम करके शरीर को डेटोक्स करने में मदद करता है.
4. 25 ग्राम अजवायन बीजों को 125 ml पानी में उबाले और प्रतिदिन 1-2 बार पीया करें. 
5. जब कभी शराब की तीव्र इच्छा हो तो उस समय कुछ मीठा खा लिया करें. अनेक रोगियों ने इस प्रयोग के बाद आराम बताया है.
6. अनेक आयुर्वेदिक विशेषज्ञ शराब की लत छुडाने के लिए भोजन में दही का कुछ अधिक सेवन करने की सलाह देते हैं.
7. अनार, सेब अथवा अंगूर का रस यदि नियमित लिया जाय तो भी शराब की इच्छा में कमी आती देखी गयी है.
8. 10 ग्राम शुद्ध घी को मिश्री के साथ सुबह सेवन करना चाहिए. इससे शरीर में उपस्थित विषों का शमन होता है ऐसा आयुर्वेद विशेषज्ञों का मत है.
9. पानी में कुछ खजूर घिसें तथा दिन में दो या तीन बार इस मिश्रण का सेवन करें। 
10. करेले के रस में थोड़ी छाछ मिलाकर प्रतिदिन पीयें.
11. गाजर शराब पीने की इच्छा को कम करने में सहायक होता है, 1 गिलास गाजर का जूस पीयें और आपको शराब की इच्छा में खुद ही कमी प्रतीत होने लगेगी।
12. किशमिश का 1 -2 दाना मुंह में डालकर चूसें इसके आलावा वह किशमिश का शरबत का भी सेवन करें।
13. शिमला मिर्च (कैप्सिकम ) लेकर जूसर से उसका रस निकाल लीजिए । इस रस का सेवन दिन में दो बार आधा आधा कप भोजन के बाद करें । इस उपाय से शराब की तलब अपने आप घटने लगती है ।
14. अदरक के छोटे छोटे टुकड़े कर लें और उस मे नींबू निचोड़ कर थोड़ा सा काला नमक मिला कर इसको धूप मे सूखा लें. सुखाने के बाद अदरक के टुकड़ो को अपनी जेब मे रख लें. जब भी दिल करे तभी इसे चूसना शुरू कर दें. कुछ ही दिनों में आप शराब की लत से मुक्ति पा लेंगे.

 

शराब पीने की लत में विशिष्ट उपचार-

शरीर की शुद्धि के लिए एक विशिष्ट आयुर्वेदिक उपचार प्रक्रिया जिसे पंचकर्म चिकित्सा कहा जाता है उसका भी प्रयोग अनेक आयुर्वेदिक विशेषज्ञ करते हैं. इस उपचार में विशिष्ट उपचारों का कर्म होता है जिसे रोगी की अवस्थानुसार उस पर प्रयोग किया जाता है. इस प्रक्रिया में मुख्य रूप से वमन ( उर्ध्वभाग से दोषों को निकालना ), विरेचन (अधोभाग से दोषों को निकालना), वस्ति (एनीमा जैसी परन्तु उसके गुणों से अलग प्रक्रिया), नस्य ( नासा मार्ग से दवाओं का शरीर में प्रवेश) और रक्तमोक्षण इत्यादि प्रक्रियाओं द्वारा शरीर की शुद्धि करी जाती है.

 

शराब की लत छुड़ाने में उपयोगी आयुर्वेदिक वनस्पतियाँ-

शराब की लत की चिकित्सा में विशेषज्ञ इलाज की अलग अलग अवस्थाओं में निम्न औषधियों के प्रयोग से रोगियों को लाभ देते हैं-

Improving memory, concentration and to antidepressant properties:

Withania somnifera (अश्वगंधा), Pueraria lobata (कुड्जू), Convolvulus pluricaulis (शंखपुष्पी), Bacopa monneiri (ब्राह्मी)

 

Herbs to treat sleep problems:

Nardostachys jatamansi (जटामांसी), Myristica fragrans (जातिपत्री),Bacopa monneiri (ब्राह्मी), Rauwfelia serpentine (सर्पगन्धा)

 

Herbs beneficial in liver disorders:

Boherrevia diffusa (पुनर्नवा), काली मिर्च, घृत कुमारी, Picorrhiza curora (कुटकी), तुलसी.

 

दर्द निवारक  herbs-

रास्ना, गुग्गुलु, शल्लकी.

 

शोथ निवारक herbs–

दशमूल 

Aegle marmelos (बिल्व ), Premna mucronata (अग्निमन्थ), Oroxylum indicum(श्योनाक), Stereospermum suaveolens(पाटला),  Gmelina arborea (गम्भारी), Solanum indicum(ब्रहती), Solanum xanthocarpum(कंटकारी), Tribulus terrestris(गोक्षुर), Desmodium gangeticum ( शालपर्णी), Uraria picta (पृष्णपर्णी )

 

अन्य प्राकृतिक उपाय :

  1. सम्पूर्ण शरीर की व्यवस्थित रूप से मसाज से तंत्रिका तन्त्र, मांसपेशी संस्थान और मनोवाही संस्थान में एक साम्यावस्था आती है और रोगी को ऊर्जा मिलने लगती है.
  2. मृदा स्नान से केन्द्रीय तंत्रिका तन्त्र को मजबूती मिलती है.
  3. नियमित व्यायाम करने से शरीर में लचीलापन आता है और मानसिक तनाव से मुक्ति प्राप्त होती है.
  4. योग और प्राणायाम के नियमित अभ्यास से शरीर की इच्छाशक्ति मज़बूत होकर शराब की लत से दूर रहने में आराम होता है.

 

दिनचर्या हेतु उपयोगी सुझाव-

  1. सकारात्मक कार्यों में अपनी ऊर्जा लगायें तथा नकारात्मक लोगों और विचारों से दूर रहें.
  2. वर्तमान में जीयें और भविष्य या बीते हुए दिनों की चिंता में स्वयं की मानसिक अवस्था में कमी न आने दें.
  3. प्रतिदिन ईश्वर की आराधना में अपना समय लगायें जिससे आपके अन्दर सकारात्मक विचारों का प्रवेश होता रहे.
  4. कोशिश करें कि घर से बाहर खाली पेट न जाएँ और शराब के लती लोगों के सानिध्य से दूर रहें.
  5. आयुर्वेद के मतानुसार मांसाहारी भोजन से राजसिक और तामसिक गुणों की वृद्धि होती है जिससे शराब की इच्छा बलवती हो जाएगी.

 

विशेष-

यह लेख शराब की लत की आयुष चिकित्सा द्वारा सम्भावनाओं के बारे में जागरूकता के लिए लोगों की मांग पर लिखा गया है. यह लेख alcoholism की दीर्घावधि चिकित्सा हेतु नहीं है. चूँकि हर रोगी की अवस्था अलग अलग होती है इसलिए हर रोगी का उपचार इस लेख के माध्यम से सम्भव नहीं है. इसमें बताये गए उपायों से यदि आपको लाभ मिलता है तो अवश्य ही और लोगों तक पहुचाएं. शराब की लत बुरी है और इसकी लत से मुक्ति के लिए अपने निकट के आयुष चिकित्सा सेंटर / अधिकृत चिकित्सक / अधिकृत नशा मुक्ति केंद्र से ही इलाज कराएँ. किसी भी रोग के इलाज के लिए गारंटी से इलाज करने वाले लोग फर्जी होते हैं. झोलाछापों और अनधिकृत लोगों से चिकित्सा कराना अपने जीवन से खिलवाड़ करना है.

 

सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः  

सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद्दुःखभाग्भवेत् 

 

  शेष अगली पोस्ट में.....

प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा में, 

डॉ. स्वास्तिक जैन 

 


Dr. Naveen Chauhan

B.A.M.S, C.C.Y.P, P.G.C.R.A.V
(Kshara-sutra) Ayurveda Consultant& Kshara-sutra surgical specialist for proctological diseases